टीम इंडिया ने रविवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया को 137 रन से हरा दिया। इस साल उसने विदेश में अपनी चौथी टेस्ट जीत हासिल की। उसने पहली बार एक कैलेंडर ईयर में विदेश में चार टेस्ट जीते हैं। इसमें उसके गेंदबाजों का अहम योगदान रहा। उसके गेंदबाजों ने 39 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। भारतीय गेंदबाजों ने इस साल 14 टेस्ट खेले। इसमें उन्होंने 257 विकेट लिए। भारतीय टेस्ट क्रिकेट के 86 साल के इतिहास में गेंदबाजों ने पहली बार एक साल में इतने विकेट लिए हैं। इससे पहले 1979 में भारतीय गेंदबाजों ने 17 मैच में 237 विकेट लिए थे।
इस साल ओवरऑल सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में भी भारतीय गेंदबाज शीर्ष पर हैं। इस सूची में इंग्लैंड दूसरे नंबर पर है। उसके गेंदबाजों ने इस साल 13 टेस्ट में 213 विकेट लिए। श्रीलंका 197 विकेट के साथ तीसरे नंबर पर है। 186 विकेट लेने वाली दक्षिण अफ्रीका चौथे नंबर पर है।
इस साल भारतीयों में सबसे ज्यादा 48 विकेट जसप्रीत बुमराह ने लिए। मोहम्मद शमी 47 विकेट के साथ दूसरे नंबर पर रहे। बुमराह ने नौ टेस्ट में 2.65 की इकॉनमी और शमी ने 12 टेस्ट में 3.30 की इकॉनमी से विकेट लिए हैं। इस दौरान बुमराह का एक पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/33 और शमी का 6/56 रहा। वहीं, इशांत शर्मा ने 11 टेस्ट में 41 और रविचंद्रन अश्विन ने 10 टेस्ट में 38 विकेट हासिल किए। इस साल भारत के 10 गेंदबाजों ने 255 विकेट लिए।
बुमराह ने तीन देशों के खिलाफ 5-5 विकेट लिए
बुमराह ने इस साल अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की। उन्होंने पहले ही साल ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच-पांच विकेट लिए। वे एक कैलेंडर ईयर में इन तीन देशों के खिलाफ 5-5 विकेट लेने वाले पहले एशियाई हैं। वहीं, शमी ने इस साल दो बार पारी में 5-5 विकेट लिए। बुमराह-शमी के अलावा भारत के इशांत शर्मा, उमेश यादव, हार्दिक पंड्या और कुलदीप यादव भी पारी में 5-5 विकेट लेने में सफल रहे। उमेश ने इस साल पांच टेस्ट में 20, हार्दिक ने आठ टेस्ट में 13, कुलदीप ने तीन टेस्ट में 10 विकेट हासिल किए हैं।
1979 में 13 गेंदबाजों ने लिए थे 237 विकेट
इससे पहले भारतीय गेंदबाजों का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1979 में रहा था। उस वक्त अकेले कपिल देव ने 17 टेस्ट में 74 विकेट अपने नाम किए थे। वहीं, दिलीप दोशी ने 10 टेस्ट में 40, करसन घावरी ने 17 टेस्ट में 39, शिवलाल यादव ने नौ टेस्ट में 32, श्रीनिवास वेंकटराघवन ने 10 टेस्ट में 23 विकेट लिए थे। इनके अलावा रोजर बिन्नी ने चार टेस्ट में नौ, बिशन सिंह बेदी ने तीन टेस्ट में सात, भागवत चंद्रशेखर ने तीन टेस्ट में पांच, मोहिंदर अमरनाथ ने चार टेस्ट में तीन, बॉबजी नरसिम्हा राव ने तीन टेस्ट में दो और चेतन चौहान, गुंडप्पा विश्वनाथ, धीरज प्रसन्ना ने एक-एक विकेट लिए थे।
दक्षिण अफ्रीका के रबाडा दुनिया भर में टॉप पर
वैसे इस साल सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट दक्षिण अफ्रीका के कगिसो रबाडा ने लिए हैं। रबाडा ने इस साल 10 टेस्ट में 3.15 की इकॉनमी से 52 विकेट अपने नाम किए। इस सूची में श्रीलंका के दिलरुवन परेरा दूसरे नंबर पर हैं। उनके नाम 11 टेस्ट में 50 विकेट हैं। 49 विकेट लेने वाले ऑस्ट्रेलिया के नाथन लियोन तीसरे नंबर पर हैं। बुमराह और शमी क्रमशः चौथे और पांचवें नंबर पर हैं।
शमी विदेश में 100+ विकेट लेने वाले 10वें भारतीय
मोहम्मद शमी ने मेलबर्न टेस्ट में पहली पारी में पैट कमिंस का विकेट लिया था। इसके साथ ही वे विदेश में 100 से ज्यादा विकेट लेने वाले भारत के 10वें गेंदबाज और पांचवें तेज गेंदबाज बन गए थे। उनसे पहले अनिल कुंबले, कपिल देव, जहीर खान, हरभजन सिंह, बिशन सिंह बेदी, जवागल श्रीनाथ, रविचंद्रन अश्विन, इशांत शर्मा और भागवत चंद्रशेखर विदेश में 100 से ज्यादा विकेट अपने नाम कर चुके हैं।
Monday, December 31, 2018
Monday, December 17, 2018
13 साल का भारतीय किशोर दुबई में बना सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी का मालिक
13 साल की उम्र में जहां आम लोग स्कूल पढ़ाई कर रहे होते हैं या होमवर्क के बोझ तले दबे होते हैं. वहीं दुबई में रहने वाला एक भारतीय किशोर महज 13 साल की उम्र में ही एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी का मालिक बन गया है. टेक्नोलॉजी के इस नन्हे जादूगर ने 9 साल की उम्र में ही पहला ऐप बना लिया था. इस जादूगर का नाम है आदित्यन राजेश और इनका ताल्लुक केरल से है.
खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आदित्यन ने 5 साल की उम्र में ही कम्प्यूटर का इस्तेमाल शुरू कर दिया था और पहला मोबाइल ऐप महज 9 साल की ही उम्र में ही बना लिया था. अब 13 बरस होने के बाद उसने अपनी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी की शुरुआत की है. इसका नाम ‘ट्रिनेट सॉल्यून्स’ है. कंपनी में फिलहाल तीन कर्मचारी हैं जो आदित्यन के ही स्कूल के दोस्त और स्टूडेंट हैं.
आदित्यन ने ऐप बनाने का काम शौकिया तौर पर शुरू किया था. प्राप्त जानकारी के मुताबिक वह अपने ग्राहकों के लिए लोगो और वेबसाइट भी बनाता रहा है. अखबार के मुताबिक, आदित्यन का जन्म केरल के तिरुविला में हुआ था. अखबार से बातचीत में आदित्यन ने कहा, मैं पांच साल का था तब मेरा परिवार दुबई आ गया था. पहली बार मेरे पिता ने मुझे बीबीसी टाइपिंग दिखाई थी. ये बच्चों के लिए एक वेबसाइट है जहां छोटी उम्र के छात्र टाइपिंग सीख सकते हैं.
आदित्यन ने कहा कि मुझे सचमुच एक स्थापित कंपनी का मालिक बनने के लिए 18 साल से ज्यादा उम्र का होने तक इंतजार करना पड़ेगा. हालांकि हम एक कंपनी की तरह ही काम करते हैं. अब तक हमने 12 से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ काम किया है.
मुंह बंद रखने की धमकी
आरोप है कि सुलेखा ने नाबालिग को नवादा के विधायक राजबल्लभ के हवाले कर दिया. विधायक ने उसके साथ रेप किया. लड़की को सात फरवरी को बिहारशरीफ में उसके घर छोड़ दिया गया और उसे मुंह बंद रखने की धमकी दी गई. थाने में मामला दर्ज होने के बाद से विधायक राजबल्लभ यादव फरार हो गए थे. एक महीने के बाद सरेंडर किया था.
सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था
इस मामले में 30 सितंबर को पटना उच्च न्यायालय ने राजबल्लभ को जमानत दी थी. इसके बाद विधायक की जमानत रद्द करने के लिए बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मामला दर्ज होने के बाद राजद ने नवादा क्षेत्र से विधायक राजबल्लभ को पार्टी से निलंबित कर दिया था. फिलहाल इस मामले में वे जेल में बंद थे.
खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आदित्यन ने 5 साल की उम्र में ही कम्प्यूटर का इस्तेमाल शुरू कर दिया था और पहला मोबाइल ऐप महज 9 साल की ही उम्र में ही बना लिया था. अब 13 बरस होने के बाद उसने अपनी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी की शुरुआत की है. इसका नाम ‘ट्रिनेट सॉल्यून्स’ है. कंपनी में फिलहाल तीन कर्मचारी हैं जो आदित्यन के ही स्कूल के दोस्त और स्टूडेंट हैं.
आदित्यन ने ऐप बनाने का काम शौकिया तौर पर शुरू किया था. प्राप्त जानकारी के मुताबिक वह अपने ग्राहकों के लिए लोगो और वेबसाइट भी बनाता रहा है. अखबार के मुताबिक, आदित्यन का जन्म केरल के तिरुविला में हुआ था. अखबार से बातचीत में आदित्यन ने कहा, मैं पांच साल का था तब मेरा परिवार दुबई आ गया था. पहली बार मेरे पिता ने मुझे बीबीसी टाइपिंग दिखाई थी. ये बच्चों के लिए एक वेबसाइट है जहां छोटी उम्र के छात्र टाइपिंग सीख सकते हैं.
आदित्यन ने कहा कि मुझे सचमुच एक स्थापित कंपनी का मालिक बनने के लिए 18 साल से ज्यादा उम्र का होने तक इंतजार करना पड़ेगा. हालांकि हम एक कंपनी की तरह ही काम करते हैं. अब तक हमने 12 से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ काम किया है.
मुंह बंद रखने की धमकी
आरोप है कि सुलेखा ने नाबालिग को नवादा के विधायक राजबल्लभ के हवाले कर दिया. विधायक ने उसके साथ रेप किया. लड़की को सात फरवरी को बिहारशरीफ में उसके घर छोड़ दिया गया और उसे मुंह बंद रखने की धमकी दी गई. थाने में मामला दर्ज होने के बाद से विधायक राजबल्लभ यादव फरार हो गए थे. एक महीने के बाद सरेंडर किया था.
सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था
इस मामले में 30 सितंबर को पटना उच्च न्यायालय ने राजबल्लभ को जमानत दी थी. इसके बाद विधायक की जमानत रद्द करने के लिए बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मामला दर्ज होने के बाद राजद ने नवादा क्षेत्र से विधायक राजबल्लभ को पार्टी से निलंबित कर दिया था. फिलहाल इस मामले में वे जेल में बंद थे.
Wednesday, December 5, 2018
अब तक पुलिस की गिरफ्त से दूर योगेश, आज आएगी इंटेलिजेंस रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी के शक में हुई हिंसा पर राजनीति तेज होती जा रही है. इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता योगेश राज अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है. हिंसा को दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन योगेश राज का अब भी पता नहीं है. इस बीच, मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था पर बड़ी बैठक बुलाई है.
बता दें कि गोकशी के शक में हुई हिंसा व बवाल में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह समेत दो लोगों की हत्या मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा चार से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस हिंसा में एक युवक सुमित की भी गोली लगने से मौत हुई, सुमित के परिवार को योगी सरकार 10 लाख रुपये की मदद करेगी.
गौरतलब है कि इस प्रकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद गंभीर होने के कारण जांच अधिकारी एडीजी इंटेलिजेंस एसवी शिरोडकर बुलंदशहर पहुंच चुके और जांच शुरू कर दी है. वह आज अपनी रिपोर्ट सौपेंगे.
किसी संगठन का नाम नहीं आया सामने
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आनंद कुमार ने कहा कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांतिपूर्ण बनी हुई है. घटना में अभी तक किसी संगठन का नाम सामने नहीं आया है, इलाके में बड़ी संख्या में पीएसी व आरएएफ तैनात की गई है.
एडीजी ने हिंसा का शिकार हुए इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को शहीद बताते हुए कहा, "वह हमारे पुलिस परिवार के सदस्य थे, हम उनके परिवार की हरसंभव मदद करेंगे."
उन्होंने बताया कि इस मामले में 88 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 27 लोग नामजद हैं. इनमें से चार लोगों- चमन, रामबल, आशीष चौहान और सतीश की गिरफ्तारी हुई है.
एडीजी ने बताया कि एसआईटी घटनास्थल पर पहुंच गई है और अपना काम कर रही है. ये खुफिया एजेंसी की असफलता है या किसी और की, जांच रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा. उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी योगेश राज की तलाश सरगर्मी से जारी है, मारे गए युवक सुमित का पोस्टमार्टम हो चुका है. उसके शरीर में गोली पाई गई. उन्होंने स्वीकार किया कि हिंसा के दौरान पुलिस ने हवाई फायरिंग की थी.
क्या हुआ था बुलंदशहर में...?
गौरतलब है कि सोमवार (3 दिसंबर) को बुलंदशहर के स्याना थाना क्षेत्र के एक खेत में गोकशी की आशंका के बाद बवाल शुरू हुआ. जिसकी शिकायत मिलने पर सुबोध कुमार पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे थे. इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा रही थी, इतने में ही तीन गांव से करीब 400 लोगों की भीड़ ट्रैक्टर-ट्राली में कथित गोवंश के अवशेष भरकर चिंगरावठी पुलिस चौकी के पास पहुंच गई और जाम लगा दिया.
इसी दौरान भीड़ जब उग्र हुई तो पुलिस ने काबू पाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े और जल्द ही वहां फायरिंग भी होने लगी. जिसमें सुबोध कुमार घायल हो गए और एक युवक भी जख्मी हो गया. सुबोध कुमार को अस्पताल ले जाने से रोका गया और उनकी कार पर जमकर पथराव भी किया गया. अब पुष्टि हुई है कि सुबोध कुमार की मौत गोली लगने से हुई है.
आपको बता दें कि बुलंदशहर के जिलाधिकारी के अनुसार, सुबोध कुमार के सिर में गोली लगी थी, जिस कारण उनकी मौत हुई है. उन्होंने यह भी बताया है कि हमले के बाद जब सुबोध कुमार ने खेत की तरफ जाकर खुद को बचाने की कोशिश की तो भीड़ ने उन पर वहां भी हमला किया.
बता दें कि गोकशी के शक में हुई हिंसा व बवाल में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह समेत दो लोगों की हत्या मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा चार से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस हिंसा में एक युवक सुमित की भी गोली लगने से मौत हुई, सुमित के परिवार को योगी सरकार 10 लाख रुपये की मदद करेगी.
गौरतलब है कि इस प्रकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद गंभीर होने के कारण जांच अधिकारी एडीजी इंटेलिजेंस एसवी शिरोडकर बुलंदशहर पहुंच चुके और जांच शुरू कर दी है. वह आज अपनी रिपोर्ट सौपेंगे.
किसी संगठन का नाम नहीं आया सामने
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आनंद कुमार ने कहा कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांतिपूर्ण बनी हुई है. घटना में अभी तक किसी संगठन का नाम सामने नहीं आया है, इलाके में बड़ी संख्या में पीएसी व आरएएफ तैनात की गई है.
एडीजी ने हिंसा का शिकार हुए इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को शहीद बताते हुए कहा, "वह हमारे पुलिस परिवार के सदस्य थे, हम उनके परिवार की हरसंभव मदद करेंगे."
उन्होंने बताया कि इस मामले में 88 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 27 लोग नामजद हैं. इनमें से चार लोगों- चमन, रामबल, आशीष चौहान और सतीश की गिरफ्तारी हुई है.
एडीजी ने बताया कि एसआईटी घटनास्थल पर पहुंच गई है और अपना काम कर रही है. ये खुफिया एजेंसी की असफलता है या किसी और की, जांच रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा. उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी योगेश राज की तलाश सरगर्मी से जारी है, मारे गए युवक सुमित का पोस्टमार्टम हो चुका है. उसके शरीर में गोली पाई गई. उन्होंने स्वीकार किया कि हिंसा के दौरान पुलिस ने हवाई फायरिंग की थी.
क्या हुआ था बुलंदशहर में...?
गौरतलब है कि सोमवार (3 दिसंबर) को बुलंदशहर के स्याना थाना क्षेत्र के एक खेत में गोकशी की आशंका के बाद बवाल शुरू हुआ. जिसकी शिकायत मिलने पर सुबोध कुमार पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे थे. इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा रही थी, इतने में ही तीन गांव से करीब 400 लोगों की भीड़ ट्रैक्टर-ट्राली में कथित गोवंश के अवशेष भरकर चिंगरावठी पुलिस चौकी के पास पहुंच गई और जाम लगा दिया.
इसी दौरान भीड़ जब उग्र हुई तो पुलिस ने काबू पाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े और जल्द ही वहां फायरिंग भी होने लगी. जिसमें सुबोध कुमार घायल हो गए और एक युवक भी जख्मी हो गया. सुबोध कुमार को अस्पताल ले जाने से रोका गया और उनकी कार पर जमकर पथराव भी किया गया. अब पुष्टि हुई है कि सुबोध कुमार की मौत गोली लगने से हुई है.
आपको बता दें कि बुलंदशहर के जिलाधिकारी के अनुसार, सुबोध कुमार के सिर में गोली लगी थी, जिस कारण उनकी मौत हुई है. उन्होंने यह भी बताया है कि हमले के बाद जब सुबोध कुमार ने खेत की तरफ जाकर खुद को बचाने की कोशिश की तो भीड़ ने उन पर वहां भी हमला किया.
Tuesday, November 6, 2018
24 साल बाद लखनऊ में इंटरनैशनल क्रिकेट मैच, जानें अटल स्टेडियम की खूबियां
करीब 24 साल बाद लखनऊ किसी इंटरनैशनल क्रिकेट मैच की मेजबानी के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 'भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम' का उद्घाटन किया।
करीब 24 साल बाद लखनऊ किसी इंटरनैशनल क्रिकेट मैच की मेजबानी के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 'भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम' का उद्घाटन किया। आज शाम को यहां भारत और वेस्ट इंडीज की टीमें टी20 इंटरनैशनल मैच खेलेंगी।
नवाबों के शहर में बने इस स्टेडियम में करीब 50 हजार लोग एक साथ क्रिकेट मैच का लुत्फ ले सकेंगे। करीब 24 साल बाद लखनऊ शहर में कोई इंटरनैशनल मैच आयोजित हो रहा है। इससे पहले आखिरी बार यहां जनवरी 1994 में भारत और श्री लंका के बीच केडी सिंह बाबू स्टेडियम में टेस्ट मैच के रूप में खेला गया था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को यूपी के राज्यपाल राम नाईक की मंजूरी के बाद इकाना स्टेडियम का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा। अब इस स्टेडियम का नाम 'भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम' है।
इस स्टेडियम की खूबियों की बात करें, तो यहां...
71 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस स्टेडियम में 9 पिचें हैं। यहं बनी पिचों की खासियत भी कमाल है। यहां 5 पिचों को महाराष्ट्र की लाल मिट्टी से तैयार किया गया है, जबकि बाकी की 4 पिचें कटक की काली मिट्टी से बनाया गया है।
इस स्टेडियम में शानदार आधुनिक ड्रेसिंग रूम हैं। ड्रेसिंग रूम के अलावा यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर 4 वीआईपी लाउंज हैं। पहले लाउंज में 232, दूसरे में 228, तीसरे में 144 और चौथे लाउंज में 120 सीटों की शानदार व्यवस्था है।
इस स्टेडियम में खेले जाने वाले पहले इंटरनैशनल टी-20 मैच को देखने के लिये प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई कैबिनेट मंत्रियों के मौजूद रहने का कार्यक्रम है।
भारत और वेस्ट इंडीज के बीच कोलकाता में खेला गया पहला टी20 मैच रिजल्ट के दृष्टिकोण से बिल्कुल अलग नहीं था। जैसे विंडीज टीम पहले टेस्ट और फिर वनडे में नहीं जीत पाई ठीस इसी तरह वे टी20 में भी हार गए। लेकिन वेस्ट इंडीज युवा तेज गेंदबाज ओशाने थॉमस ने जरूर वेस्ट इंडीज के पुराने पेस अटैक की याद दिला दी।
थॉमस भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ जिस पेस और बाउंस से बोलिंग कर रहे थे। इससे भारतीय बल्लेबाज मुश्किल में दिख रहे थे। थॉमस के साथ विंडीज कप्तान कार्लोस ब्राथवेट ने भी अपनी लंबाई का अच्छा इस्तेमाल किया और गेंद को सही लेंथ पर रखा, जिससे भारतीय बल्लेबाज बैकफुट पर दिख रहे थे।
करीब 24 साल बाद लखनऊ किसी इंटरनैशनल क्रिकेट मैच की मेजबानी के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 'भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम' का उद्घाटन किया। आज शाम को यहां भारत और वेस्ट इंडीज की टीमें टी20 इंटरनैशनल मैच खेलेंगी।
नवाबों के शहर में बने इस स्टेडियम में करीब 50 हजार लोग एक साथ क्रिकेट मैच का लुत्फ ले सकेंगे। करीब 24 साल बाद लखनऊ शहर में कोई इंटरनैशनल मैच आयोजित हो रहा है। इससे पहले आखिरी बार यहां जनवरी 1994 में भारत और श्री लंका के बीच केडी सिंह बाबू स्टेडियम में टेस्ट मैच के रूप में खेला गया था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को यूपी के राज्यपाल राम नाईक की मंजूरी के बाद इकाना स्टेडियम का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा। अब इस स्टेडियम का नाम 'भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम' है।
इस स्टेडियम की खूबियों की बात करें, तो यहां...
71 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस स्टेडियम में 9 पिचें हैं। यहं बनी पिचों की खासियत भी कमाल है। यहां 5 पिचों को महाराष्ट्र की लाल मिट्टी से तैयार किया गया है, जबकि बाकी की 4 पिचें कटक की काली मिट्टी से बनाया गया है।
इस स्टेडियम में शानदार आधुनिक ड्रेसिंग रूम हैं। ड्रेसिंग रूम के अलावा यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर 4 वीआईपी लाउंज हैं। पहले लाउंज में 232, दूसरे में 228, तीसरे में 144 और चौथे लाउंज में 120 सीटों की शानदार व्यवस्था है।
इस स्टेडियम में खेले जाने वाले पहले इंटरनैशनल टी-20 मैच को देखने के लिये प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई कैबिनेट मंत्रियों के मौजूद रहने का कार्यक्रम है।
भारत और वेस्ट इंडीज के बीच कोलकाता में खेला गया पहला टी20 मैच रिजल्ट के दृष्टिकोण से बिल्कुल अलग नहीं था। जैसे विंडीज टीम पहले टेस्ट और फिर वनडे में नहीं जीत पाई ठीस इसी तरह वे टी20 में भी हार गए। लेकिन वेस्ट इंडीज युवा तेज गेंदबाज ओशाने थॉमस ने जरूर वेस्ट इंडीज के पुराने पेस अटैक की याद दिला दी।
थॉमस भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ जिस पेस और बाउंस से बोलिंग कर रहे थे। इससे भारतीय बल्लेबाज मुश्किल में दिख रहे थे। थॉमस के साथ विंडीज कप्तान कार्लोस ब्राथवेट ने भी अपनी लंबाई का अच्छा इस्तेमाल किया और गेंद को सही लेंथ पर रखा, जिससे भारतीय बल्लेबाज बैकफुट पर दिख रहे थे।
Thursday, November 1, 2018
वे लोग जिन पर 'फ़ेक न्यूज़' फैलाने और उनसे कमाई का आरोप है
भारत में आरोप लगे हैं कि फ़ेक न्यूज़ के कारण भीड़ की हिंसा और लिंचिंग के मामलों में लोगों की मौत हुई है.
ऐसे कौन से लोग हैं जो ऐसे ट्विटर हैंडल्स और फ़ेसबुक पन्ने या वेबसाइट्स चलाते हैं जिन पर फ़ेक न्यूज़ फैलाने के आरोप लगे हैं?
फ़ेक न्यूज़ के फैलने में व्हाट्स ऐप को ज़िम्मेदार माना जाता है जिसके भारत में 20 करोड़ से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक साल 2018 में फ़ेक न्यूज़ के कारण 24 लोगों की मौत हुई है.
इसी विषय की जांच के लिए हम ग्वालियर पहुंचे.
शहर के मशहूर राम मंदिर के सामने शॉपिंग कॉम्प्लेस में आकाश सोनी का दफ़्तर है.
आकाश ख़ुद को 'बाल स्वयंसेवक' बताते हैं जो चार साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं.
पिछले "छह सालों से" आकाश सोनी 'बीजेपी ऑल इंडिया' नाम से एक फ़ेसबुक पेज चला रहे हैं.
इस पेज के क़रीब 12 लाख फ़ेसबुक लाइक्स हैं.
फ़ैक्ट-चेकर वेबसाइट 'ऑल्ट न्यूज़' ने 'बीजेपी ऑल इंडिया' फ़ेसुबक पन्ने को लगातार फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाला बताया है.
'ऑल्ट न्यूज़' के मुताबिक पन्ने पर छपी एक तस्वीर में दावा किया गया कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी को अमरीका के एक हवाईअड्डे में जांच के दौरान कपड़े उतारने पड़े हैं. ये फ़ेक ख़बर थी.
फ़ेक न्यूज़ के पीछे सोच क्या
ये ख़बरें क्यों छपीं, इस पर आकाश सोनी के अपने तर्क हैं. कभी वो पोस्ट में ग़लती की बात करते हैं, कभी कहते हैं कि ग़लत ख़बरें तो मीडिया के हर हिस्से में चलती हैं तो सिर्फ़ उन पर सवाल क्यों. वो ऑल्ट न्यूज़ की विश्वसनीयता और उसकी फ़ंडिंग पर सवाल उठाते हैं.
आकाश के अनुसार वो 'वी सपोर्ट अमित शाह', 'वंदे मातरम' और ख़ुद के नाम से भी फ़ेसबुक पन्ने चलाते हैं.
कई फ़ेसबुक ग्रुप्स के सदस्य आकाश ने बताया कि वो क़रीब 350 व्हाट्सऐप ग्रुप्स से जुड़े हैं जहां से उन्हें लगातार जानकारियां मिलती रहती हैं जिसे वो फ़ेसबुक पन्नों पर पोस्ट करते हैं.
आकाश बताते हैं कि इस फ़ेसबुक पन्ने ने उन्हें एक पहचान दी है और पेज पर समस्याओं के ज़िक्र भर से उसका हल निकल जाता है.
सीसीटीवी कैमरों से लैस आकाश सोनी के दफ़्तर में दरवाज़े के साथ स्वामी विवेकानंद की एक लंबी-सी तस्वीर लगी थी.
हाथ में दो मोबाइल, माथे पर टीका और कुर्ता पहने आकाश सोनी की कुर्सी और मेज़ के सामने सोफ़ा रखा है.
आकाश के मुताबिक इसी दफ़्तर में वो सुबह से देर रात तक विभिन्न फ़ेसबुक पन्नों के लिए सामग्री जुटाते हैं.
पेशेवराना तरीके से होता है काम
उनकी सोच किसी डिजिटल न्यूज़रूम में काम करने वाले प्रोफ़ेशनल जैसी है - सुबह क्या छपना चाहिए, दफ़्तर से पहले या बाद में लोग क्या पढ़ना चाहेंगे, दोपहर में लोग क्या देखना चाहेंगे, वो ये सब बातें ध्यान में रखकर फ़ेसबुक पोस्ट करते हैं.
एक सूत्र के मुताबिक गूगल ऐड्स के माध्यम से कई लोगों की मासिक कमाई लाखों में होती है, इसलिए ज़रूरी होता है कि लोगों को पन्नों पर आने और क्लिक करने के लिए प्रेरित किया जाए.
'बीजेपी ऑल इंडिया' पेज पर भाजपा और नरेंद्र मोदी के पक्ष में बातों के अलावा कोशिश है पेज पर आने वाले हर सब्स्क्राइबर के लिए कुछ न कुछ हो, जैसे राशिफल, स्वास्थ्य, खेल जगत, मनोरंजन के अलावा हिंदू धर्म से जुड़ी बातें.
आकाश सोनी कहते हैं, "मैं और मेरा एक मित्र राजेंद्र हर 40 मिनट में एक पोस्ट डालते हैं. अपना संदेश फैलाने के लिए बैनर होता है जो राजेंद्र और मैं बनाते हैं.... (पेज का) उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्रवाद की तरफ़ मोड़ना है, भारतीय संस्कृति को लोगों तक पहुंचाना है."
आकाश बताते हैं कि उन्होंने साल 2011 से नरेंद्र मोदी को प्रमोट करना शुरू किया ताकि "देश और युवाओं की दिशा बदली जा सके."
वो कहते हैं, "हमें पता था कि इससे (फ़ेसबुक से) हम अपनी बात लोगों तक बिना काटे-पीटे, प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक चैनल पर आपको इंतज़ार करना पड़ता है - छापें, दिखाएं या न दिखाएं, ये उन (पत्रकारों) पर निर्भर करता है."
ऐसे कौन से लोग हैं जो ऐसे ट्विटर हैंडल्स और फ़ेसबुक पन्ने या वेबसाइट्स चलाते हैं जिन पर फ़ेक न्यूज़ फैलाने के आरोप लगे हैं?
फ़ेक न्यूज़ के फैलने में व्हाट्स ऐप को ज़िम्मेदार माना जाता है जिसके भारत में 20 करोड़ से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक साल 2018 में फ़ेक न्यूज़ के कारण 24 लोगों की मौत हुई है.
इसी विषय की जांच के लिए हम ग्वालियर पहुंचे.
शहर के मशहूर राम मंदिर के सामने शॉपिंग कॉम्प्लेस में आकाश सोनी का दफ़्तर है.
आकाश ख़ुद को 'बाल स्वयंसेवक' बताते हैं जो चार साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं.
पिछले "छह सालों से" आकाश सोनी 'बीजेपी ऑल इंडिया' नाम से एक फ़ेसबुक पेज चला रहे हैं.
इस पेज के क़रीब 12 लाख फ़ेसबुक लाइक्स हैं.
फ़ैक्ट-चेकर वेबसाइट 'ऑल्ट न्यूज़' ने 'बीजेपी ऑल इंडिया' फ़ेसुबक पन्ने को लगातार फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाला बताया है.
'ऑल्ट न्यूज़' के मुताबिक पन्ने पर छपी एक तस्वीर में दावा किया गया कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी को अमरीका के एक हवाईअड्डे में जांच के दौरान कपड़े उतारने पड़े हैं. ये फ़ेक ख़बर थी.
फ़ेक न्यूज़ के पीछे सोच क्या
ये ख़बरें क्यों छपीं, इस पर आकाश सोनी के अपने तर्क हैं. कभी वो पोस्ट में ग़लती की बात करते हैं, कभी कहते हैं कि ग़लत ख़बरें तो मीडिया के हर हिस्से में चलती हैं तो सिर्फ़ उन पर सवाल क्यों. वो ऑल्ट न्यूज़ की विश्वसनीयता और उसकी फ़ंडिंग पर सवाल उठाते हैं.
आकाश के अनुसार वो 'वी सपोर्ट अमित शाह', 'वंदे मातरम' और ख़ुद के नाम से भी फ़ेसबुक पन्ने चलाते हैं.
कई फ़ेसबुक ग्रुप्स के सदस्य आकाश ने बताया कि वो क़रीब 350 व्हाट्सऐप ग्रुप्स से जुड़े हैं जहां से उन्हें लगातार जानकारियां मिलती रहती हैं जिसे वो फ़ेसबुक पन्नों पर पोस्ट करते हैं.
आकाश बताते हैं कि इस फ़ेसबुक पन्ने ने उन्हें एक पहचान दी है और पेज पर समस्याओं के ज़िक्र भर से उसका हल निकल जाता है.
सीसीटीवी कैमरों से लैस आकाश सोनी के दफ़्तर में दरवाज़े के साथ स्वामी विवेकानंद की एक लंबी-सी तस्वीर लगी थी.
हाथ में दो मोबाइल, माथे पर टीका और कुर्ता पहने आकाश सोनी की कुर्सी और मेज़ के सामने सोफ़ा रखा है.
आकाश के मुताबिक इसी दफ़्तर में वो सुबह से देर रात तक विभिन्न फ़ेसबुक पन्नों के लिए सामग्री जुटाते हैं.
पेशेवराना तरीके से होता है काम
उनकी सोच किसी डिजिटल न्यूज़रूम में काम करने वाले प्रोफ़ेशनल जैसी है - सुबह क्या छपना चाहिए, दफ़्तर से पहले या बाद में लोग क्या पढ़ना चाहेंगे, दोपहर में लोग क्या देखना चाहेंगे, वो ये सब बातें ध्यान में रखकर फ़ेसबुक पोस्ट करते हैं.
एक सूत्र के मुताबिक गूगल ऐड्स के माध्यम से कई लोगों की मासिक कमाई लाखों में होती है, इसलिए ज़रूरी होता है कि लोगों को पन्नों पर आने और क्लिक करने के लिए प्रेरित किया जाए.
'बीजेपी ऑल इंडिया' पेज पर भाजपा और नरेंद्र मोदी के पक्ष में बातों के अलावा कोशिश है पेज पर आने वाले हर सब्स्क्राइबर के लिए कुछ न कुछ हो, जैसे राशिफल, स्वास्थ्य, खेल जगत, मनोरंजन के अलावा हिंदू धर्म से जुड़ी बातें.
आकाश सोनी कहते हैं, "मैं और मेरा एक मित्र राजेंद्र हर 40 मिनट में एक पोस्ट डालते हैं. अपना संदेश फैलाने के लिए बैनर होता है जो राजेंद्र और मैं बनाते हैं.... (पेज का) उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्रवाद की तरफ़ मोड़ना है, भारतीय संस्कृति को लोगों तक पहुंचाना है."
आकाश बताते हैं कि उन्होंने साल 2011 से नरेंद्र मोदी को प्रमोट करना शुरू किया ताकि "देश और युवाओं की दिशा बदली जा सके."
वो कहते हैं, "हमें पता था कि इससे (फ़ेसबुक से) हम अपनी बात लोगों तक बिना काटे-पीटे, प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक चैनल पर आपको इंतज़ार करना पड़ता है - छापें, दिखाएं या न दिखाएं, ये उन (पत्रकारों) पर निर्भर करता है."
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